क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 1 करोड़ की नौकरी छोड़कर कोई व्यक्ति बंजर जमीन को हरे-भरे खाद्य वन (food forest) में बदल दे, जहाँ प्रकृति खुद खेती करती हो और जीवन समृद्धि से भर जाए? मनिषा लाठ गुप्ता ने यही किया—और यह कहानी आपके जीवन की दिशा भी बदल सकती है!

परिचय: कॉर्पोरेट से खाद्य वन तक की प्रेरक कहानी
हमारी आधुनिक कॉर्पोरेट दुनिया में, जहाँ हर दिन targets, profits और उपभोग की दौड़ लगी रहती है, वहाँ एक मूलभूत सवाल बार-बार उठता है—“असली समृद्धि क्या है?”
मनिषा लाठ गुप्ता, जिन्होंने Unilever, Colgate Palmolive, Axis Bank और Uber जैसी शीर्ष कंपनियों में 20 साल से अधिक समय तक काम किया, उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर अपने जीवन से दिया।
उन्होंने करोड़ों रुपये का पैकेज छोड़कर पंजाब की 12 एकड़ बंजर जमीन खरीदी और वहाँ Ananda Permaculture Farm की नींव रखी। आज यह केवल खेती नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रयोगशाला है जो दिखाती है कि permaculture farming in India कैसे जीवन, समाज और पर्यावरण को बदल सकती है।
भारत आज जलवायु संकट, मृदा क्षरण (soil regeneration की आवश्यकता), जल की कमी और किसानों की आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में sustainable agriculture in India और regenerative agriculture भविष्य की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
👉 शोध बताते हैं कि पर्माकल्चर खेती से:
- मिट्टी का कार्बन स्टॉक 27% अधिक होता है।
- मिट्टी की घनत्व 20% कम होती है।
- और केंचुओं की संख्या 201% अधिक होती है।
यह लेख आपको बताएगा कि पर्माकल्चर खेती क्या है, इसके सिद्धांत और लाभ क्या हैं, मनिषा लाठ गुप्ता की प्रेरक यात्रा से हम क्या सीख सकते हैं, और आप कैसे अपनी permaculture journey शुरू कर सकते हैं।

पर्माकल्चर खेती क्या है? (Permaculture Principles)
“Permaculture” का अर्थ है Permanent Agriculture – यानी ऐसी खेती जो प्रकृति के साथ तालमेल में हमेशा टिकाऊ रहे।
यह केवल फसल उगाने की तकनीक नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है। इसका उद्देश्य है एक ऐसा संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाना जहाँ भोजन, पानी, ऊर्जा और आवास सबकुछ प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हो।
✨ पर्माकल्चर की 3 मूल नैतिकताएँ
- पृथ्वी की देखभाल (Earth Care) 🌍
- लोगों की देखभाल (People Care) 👨👩👧👦
- संसाधनों का उचित बंटवारा (Fair Share) ⚖️
🌱 पर्माकल्चर के 12 सिद्धांत (Permaculture Principles)
- प्रकृति का अवलोकन और उससे सीखना।
- ऊर्जा का संग्रहण और भंडारण (water harvesting in agriculture)।
- हर कदम से उपज प्राप्त करना।
- आत्म-नियमन और फीडबैक स्वीकार करना।
- नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग।
- कोई कचरा पैदा न करना (zero waste farming)।
- पैटर्न से डिज़ाइन तक (nature-based design)।
- अलग करने की बजाय एकीकृत करना (integrated farming systems)।
- छोटे और धीमे समाधान।
- विविधता का मूल्यांकन (biodiversity in farming)।
- किनारों और सीमाओं का उपयोग।
- बदलाव पर रचनात्मक प्रतिक्रिया।
भारत में पर्माकल्चर की प्रासंगिकता
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में पर्माकल्चर का महत्व बहुत बड़ा है।
हैदराबाद के पास Aranya Farm एक शानदार उदाहरण है कि कैसे 20 साल में बंजर जमीन को food forest in India में बदला जा सकता है।
महाराष्ट्र में “Water Cup Competition” के दौरान हजारों गाँवों ने permaculture principles अपनाकर सूखे क्षेत्रों को हरा-भरा बना दिया।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में natural farming और organic farming India ने रसायन-आधारित खेती के विकल्प प्रदान किए।
Manisha Lath Gupta की प्रेरक कहानी
मनिषा लाठ गुप्ता की यात्रा एक प्रेरणा है। उन्होंने 2011 में पंजाब में 12 एकड़ बंजर जमीन पर पर्माकल्चर शुरू किया। आज, यह फार्म 5,000+ पेड़ों से भरा है, जहाँ नीम, पीपल, आम, लीची, अमरूद जैसे पेड़ जल संचय संरचनाओं के साथ मिट्टी को पुनर्जीवित कर रहे हैं। 2022 में वह पूर्णकालिक रूप से वहाँ रहने लगीं।
- पृष्ठभूमि: मनिषा ने उबर में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में काम किया और mojarto.com जैसी कंपनी स्थापित की, जो NDTV द्वारा खरीदी गई। लेकिन जलवायु चिंता ने उन्हें बदलाव के लिए प्रेरित किया।
- उपलब्धियाँ: फार्म अब स्वावलंबी है, विविध फसलें (फल, सब्जियाँ, दालें, मसाले) उगाई जाती हैं। आय के स्रोत: शिक्षा (ऑनलाइन कोर्स जैसे “Permaculture Starts at Home”), इको-टूरिज्म (गेस्ट हाउस), और CSA (सामुदायिक समर्थित खेती)।
- सीख: कॉर्पोरेट उपभोक्तावाद से उत्पादन की ओर बढ़ना। परिवार की भागीदारी: बच्चों के साथ छुट्टियों में पेड़ लगाना। कोई रसायन नहीं, मृदा स्वास्थ्य पर जोर। उदाहरण के लिए, वह कहती हैं, “हम प्रकृति को वापस स्थापित करते हैं, और वह हमें सब कुछ देती है।”
यह कहानी भारत के अन्य सफल फार्म्स से जुड़ती है, जैसे ऑरोविले का सॉलिट्यूड फार्म, जहाँ 28 साल पुराना food forest है, या बैंगलोर के पास द गुड अर्थ, जहाँ urban permaculture से छोटी जमीन पर उत्पादकता बढ़ी। महाराष्ट्र की वॉटर कप प्रतियोगिता में गाँवों ने shramdaan से landscape再生 किया, जिससे पानी की उपलब्धता बढ़ी। मनिषा की तरह, राजेश माते ने मुंबई छोड़कर रायगढ़ में permaculture शुरू किया, जो sustainable living का उदाहरण है।
इन कहानियों से साफ है कि regenerative agriculture से किसान न केवल आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाने में योगदान दे सकते हैं।
कॉर्पोरेट करियर से बदलाव
- Uber India की Chief Marketing Officer रहीं।
- Mojarto.com की संस्थापक, जिसे NDTV ने खरीदा।
- 20 साल का कॉर्पोरेट अनुभव।
- लेकिन जलवायु संकट और उपभोक्तावाद ने उन्हें अंदर से बदल दिया।
🌳 आनंदा फार्म की शुरुआत
2011 में पंजाब में 12 एकड़ बंजर जमीन खरीदी।
- 5000+ पेड़ लगाए (नीम, पीपल, आम, लीची, अमरूद)।
- वर्षा जल संचयन (water harvesting structures)।
- soil regeneration और natural farming पर आधारित खेती।
- बिना रसायन का food forest।
🏡 उपलब्धियाँ
- फार्म पूरी तरह स्वावलंबी।
- फसलें: फल, सब्ज़ियाँ, दालें, मसाले।
- आय के स्रोत:
- शिक्षा (online courses जैसे Permaculture Starts at Home)
- इको-टूरिज्म (farm stay, workshops)
- CSA (Community Supported Agriculture)
👉 मनिषा कहती हैं:
“हम प्रकृति को वापस स्थापित करते हैं, और वह हमें सब कुछ देती है।”

भारत और दुनिया से अन्य Food Forest के उदाहरण
Auroville का Solitude Farm, Bangalore का Good Earth और महाराष्ट्र का Water Cup ऐसे उदाहरण हैं जहाँ permaculture principles और regenerative agriculture ने जमीन की तस्वीर बदल दी।
Auroville का Solitude Farm – 28 साल पुराना food forest।
Good Earth, Bangalore – urban permaculture का उदाहरण।
Maharashtra का Water Cup – सामूहिक श्रमदान से regenerative agriculture।
Rajesh Mate, Raigad – मुंबई छोड़कर sustainable living की ओर कदम।
भारत में पर्माकल्चर खेती के लाभ

पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक लाभ पर्माकल्चर खेती की सबसे बड़ी ताकत हैं। Soil regeneration, biodiversity in farming और water harvesting से मिट्टी और पर्यावरण को फायदा मिलता है। Zero budget farming और organic farming India किसानों को आर्थिक सुरक्षा देती है। साथ ही, chemical-free भोजन से समाज और स्वास्थ्य दोनों को लाभ होता है।
1. पर्यावरणीय लाभ
- Soil regeneration से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- Water harvesting in agriculture से लाखों लीटर पानी बचता है।
- Biodiversity in farming से प्राकृतिक कीट नियंत्रण।
2. आर्थिक लाभ
- Zero budget farming से लागत लगभग शून्य।
- Organic farming India से किसानों को प्रीमियम दाम।
- CSA और workshops से अतिरिक्त आय।
3. सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ
- Chemical-free भोजन = बेहतर स्वास्थ्य।
- किसान आत्महत्याओं में कमी।
- परिवार और समुदाय की भागीदारी से सामाजिक एकता।
पर्माकल्चर खेती कैसे शुरू करें? (Step-by-Step Guide)

1. जमीन का आकलन करें और zoning करें। 2. संसाधन संचय करें, जैसे water harvesting और compost। 3. विविध पौधे लगाएँ – फल, सब्ज़ियाँ, दालें और पेड़। 4. Integrated farming systems अपनाएँ – गाय, मधुमक्खी आदि। 5. छोटे स्तर से शुरुआत करें और धीरे-धीरे विस्तार करें।
- जमीन का आकलन करें – Zone 0 (घर) से Zone 5 (जंगली क्षेत्र) तक zoning करें।
- संसाधन संचय करें – वर्षा जल संचयन (swales), compost, mulching।
- विविध रोपण करें – पेड़, फल, सब्ज़ियाँ, दालें, मसाले।
- प्रकृति के साथ एकीकरण – गायों से Jeevamrit, मधुमक्खियों से परागण।
- शहरों में शुरुआत – बालकनी में छोटे food forest।
चुनौतियाँ और भविष्य
जागरूकता की कमी, सरकारी समर्थन की कमी और प्रारंभिक श्रम जैसी चुनौतियाँ हैं, लेकिन भविष्य उज्ज्वल है। अगर सही नीतियाँ और जागरूकता लाई जाए तो अगले दशक में 10 लाख से ज्यादा किसान permaculture farming in India से जुड़ सकते हैं।
चुनौतियाँ
- जागरूकता की कमी।
- सरकारी नीतियों का अभाव।
- प्रारंभिक श्रम और समय की मांग।
- भविष्य :
- अगले 10 सालों में 10 लाख+ किसान permaculture farming in India से जुड़ सकते हैं।
- Regenerative agriculture भारत की पारंपरिक खेती + आधुनिक विज्ञान का संगम बन सकता है।
निष्कर्ष
मनिषा लाठ गुप्ता और अन्य पर्माकल्चर अग्रदूत यह दिखाते हैं कि सच्चा बदलाव संभव है।
आज की ज़रूरत है कि हम permaculture farming in India को केवल खेती न मानें, बल्कि एक आंदोलन बनाएं। चाहे आपके पास गाँव में एक एकड़ जमीन हो या शहर में सिर्फ बालकनी, आप food forest बना सकते हैं, soil regeneration कर सकते हैं और sustainable agriculture की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
👉 याद रखिए:
“अगर हम प्रकृति को सही से जीने दें, तो वह हमें जीवन देती है।” 🌱
Permaculture Farming in India – FAQs
Permaculture Farming in India – FAQs
1. पर्माकल्चर खेती (Permaculture Farming) क्या है?
पर्माकल्चर खेती एक ऐसी खेती प्रणाली है जो प्रकृति के सिद्धांतों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के साथ तालमेल बनाकर की जाती है। इसमें मिट्टी का पुनर्जनन (Soil Regeneration), जल संरक्षण (Water Harvesting), जैव विविधता (Biodiversity) और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है।
2. भारत में Permaculture Farming क्यों ज़रूरी है?
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में sustainable agriculture in India की ज़रूरत बहुत अधिक है। रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। पर्माकल्चर खेती से किसान कम लागत में ज्यादा उपज, जल संरक्षण और लंबी अवधि की स्थिर आय प्राप्त कर सकते हैं।
3. पर्माकल्चर और ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) में क्या अंतर है?
Organic Farming का फोकस सिर्फ chemical-free खेती पर होता है।
Permaculture Farming का फोकस पूरी जीवन शैली और पर्यावरण संतुलन पर होता है। इसमें food forest, water harvesting, renewable energy और integrated farming systems को भी शामिल किया जाता है।
4. भारत में पर्माकल्चर खेती कौन-कौन से राज्य में लोकप्रिय है?
भारत में यह खेती आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में लोकप्रिय हो रही है। इसके अलावा Auroville (Tamil Nadu), Aranya Farm (Hyderabad), Solitude Farm (Auroville) और Ananda Permaculture Farm (Punjab) प्रमुख उदाहरण हैं।
5. पर्माकल्चर खेती कैसे शुरू करें?
जमीन और मिट्टी का आकलन करें।
Water Harvesting की संरचना बनाएँ।
Diverse Plantation (फल, सब्ज़ी, दाल, पेड़-पौधे) करें।
Integrated Farming Systems (पशुपालन, मधुमक्खी, पोल्ट्री आदि) जोड़ें।
छोटे पैमाने से शुरुआत करें और धीरे-धीरे विस्तार करें।
6. Permaculture Farming in India से किसान को क्या लाभ मिलता है?
Chemical-free स्वस्थ भोजन
Zero Budget Farming से लागत कम
Soil Fertility और Water Conservation
Long-term Sustainable Income
Agro-tourism और CSA (Community Supported Agriculture) से अतिरिक्त आय
7. क्या शहरों में भी पर्माकल्चर संभव है?
हाँ, Urban Permaculture तेजी से लोकप्रिय हो रही है। शहरों में बालकनी, टैरेस और छोटे बगीचे में food forest, vertical farming और composting करके पर्माकल्चर अपनाया जा सकता है।
8. पर्माकल्चर खेती का भविष्य भारत में कैसा है?
भारत में आने वाले दशक में 10 लाख से ज्यादा किसान permaculture farming in India से जुड़ सकते हैं। सरकार और NGOs अगर training, subsidy और awareness programs को बढ़ाएँ, तो यह खेती देश की food security और climate change solutions का अहम हिस्सा बन सकती है।
