भारत के अमीर अब प्रॉपर्टी नहीं खरीदते – 2025 रियल एस्टेट प्लेबुक

भारत के अमीर अब प्रॉपर्टी नहीं खरीदते – 2025 रियल एस्टेट प्लेबुक

Realzapp expert mr k yashwant
Written by Realzapp Expert

September 26, 2025

कभी ऐसा समय था जब भारत में प्रॉपर्टी खरीदना ही अमीरी की सबसे बड़ी पहचान माना जाता था। अगर किसी के पास ज़मीन, आलीशान मकान या कमर्शियल बिल्डिंग है, तो उसे “धनी” कहा जाता था। लेकिन समय बदल गया है।

आज भारत के कई रियल एस्टेट एडवाइज़र और वेल्थ मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि “भारत के अमीर अब प्रॉपर्टी नहीं खरीदते”। यह सुनकर आम इंसान को हैरानी होती है, क्योंकि ज्यादातर मिडल-क्लास परिवार अब भी मानते हैं कि घर या जमीन खरीदना ही सबसे सुरक्षित और सबसे अच्छा निवेश है।

लेकिन अमीरों की सोच बदल चुकी है।

  • उन्हें अब प्रॉपर्टी में पहले जैसा रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) नहीं दिख रहा।
  • मेंटेनेंस, टैक्स और liquidity की दिक्कतें पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गई हैं।
  • इसके अलावा अब नए इन्वेस्टमेंट टूल्स जैसे REITs (Real Estate Investment Trusts), Fractional Ownership, और ग्लोबल प्रॉपर्टी मार्केट्स अमीरों के लिए और भी आकर्षक विकल्प बन चुके हैं।

असल में, जहाँ मिडल-क्लास लोग अब भी “ज़मीन या घर खरीदकर बैठ जाना” सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं, वहीं अमीर लोग अब कैश फ्लो-बेस्ड इन्वेस्टमेंट और डाइवर्सिफिकेशन की तरफ़ बढ़ रहे हैं।

आगे इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे:

  • आखिर क्यों अमीर अब प्रॉपर्टी नहीं खरीद रहे?
  • नया “रियल एस्टेट प्लेबुक” कैसा दिख रहा है?
  • इसमें REITs और fractional ownership जैसे मॉडल किस तरह से भूमिका निभा रहे हैं?
  • और सबसे ज़रूरी – इसका असर आम निवेशकों और मिडल-क्लास परिवारों पर क्या होगा?
भारत में अमीर लोग क्यों छोड़ रहे हैं प्रॉपर्टी खरीदने की रणनीति

भारत में अमीर लोग क्यों छोड़ रहे हैं प्रॉपर्टी खरीदने की रणनीति

Table of Contents

भारत में लंबे समय से यह मान्यता रही है कि “जितनी ज़्यादा प्रॉपर्टी, उतना ज़्यादा स्टेटस।” लेकिन आज की तारीख़ में देश के कई Ultra High Networth Individuals (UHNIs) और HNIs (High Networth Individuals) अब प्रॉपर्टी को लेकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

1. कम रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI)

पहले प्रॉपर्टी की कीमतें हर साल तेज़ी से बढ़ती थीं। 2005 से 2015 के बीच कई शहरों में जमीन और मकानों की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में प्रॉपर्टी का कैपिटल एप्रिसिएशन (capital appreciation) रुक गया है।

  • उदाहरण के तौर पर, दिल्ली-NCR और मुंबई में 10 साल पहले जहाँ प्रॉपर्टी का रिटर्न 15–20% सालाना था, वहीं आज औसतन 5–7% रह गया है।
  • जब बैंक FD, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड भी लगभग इतने या इससे बेहतर रिटर्न दे रहे हैं, तो अमीर लोग “कम मेहनत, ज़्यादा रिटर्न” वाले विकल्प चुनने लगे हैं।

2. मेंटेनेंस और टैक्स का बोझ

लक्ज़री प्रॉपर्टी, फार्महाउस या कमर्शियल बिल्डिंग रखने का मतलब है भारी-भरकम खर्च:

  • मेंटेनेंस स्टाफ, सिक्योरिटी, रिपेयरिंग और सर्विस चार्ज।
  • प्रॉपर्टी टैक्स, स्टांप ड्यूटी और अन्य सरकारी शुल्क।
    यानी नेट इनकम (Net Income) बहुत कम बचती है। इसके मुकाबले REIT या fractional property में टैक्स-एफ़िशिएंट और कम झंझट वाले विकल्प मिल जाते हैं।

3. Liquidity की कमी

ज़मीन या बड़ा मकान बेचने में अक्सर महीनों या सालों का समय लग जाता है। Buyers ढूँढना आसान नहीं होता और negotiation लंबा चलता है।

  • इसके विपरीत, REITs या शेयर-बाजार आधारित प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट्स को investor आसानी से buy या sell कर सकते हैं।
  • यानी अमीरों के लिए “liquidity” सबसे बड़ा कारण है प्रॉपर्टी से दूरी बनाने का।

4. नई Opportunities की ओर आकर्षण

आज के UHNI सिर्फ़ इंडिया ही नहीं, बल्कि दुबई, सिंगापुर और लंदन जैसे ग्लोबल मार्केट्स में भी निवेश कर रहे हैं। वहाँ returns भी बेहतर हैं और taxation structures भी निवेशकों के लिए आकर्षक हैं।


👉 यही कारण है कि आज के अमीर सीधे plots या flats नहीं खरीद रहे। वे अब income-generating assets (जैसे REITs, fractional co-ownership, rental yield projects) की तरफ़ शिफ्ट हो गए हैं।

REIT investments की बढ़ती लोकप्रियता और भारत में Office REIT outperform क्यों कर रहे हैं

REIT investments की बढ़ती लोकप्रियता और भारत में Office REIT outperform क्यों कर रहे हैं

भारत के अमीर निवेशकों के लिए अब REITs (Real Estate Investment Trusts) एक बेहद आकर्षक विकल्प बन चुके हैं। यह मॉडल पश्चिमी देशों में सालों से सफल रहा है और अब भारत में भी तेजी पकड़ रहा है।

1. REIT क्या है और कैसे काम करता है?

REIT एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ बड़ी-बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टीज़ (जैसे IT Parks, Malls, Grade A ऑफिसेस) को एक जगह इकट्ठा करके, छोटे-छोटे यूनिट्स में निवेशकों को बेच दिया जाता है।

  • मतलब आप सीधे कोई ऑफिस टॉवर या मॉल खरीदने की बजाय उसका एक छोटा हिस्सा खरीद लेते हैं।
  • इसके बदले आपको उस प्रॉपर्टी से मिलने वाला किराया (Rental Income) और कीमत बढ़ने पर पूंजी लाभ (Capital Appreciation) दोनों मिलते हैं।

2. भारत में REIT का बूम

आज भारत में 3 बड़े ऑफिस REITs और 1 रिटेल REIT हैं, जो मिलकर लगभग 105 मिलियन स्क्वायर फीट ऑपरेशनल प्रॉपर्टीज़ को मैनेज कर रहे हैं।

  • पिछले एक साल में इन Office REITs ने BSE Realty Index से भी बेहतर प्रदर्शन किया
  • खासकर ग्लोबल Capability Centres (GCCs) और IT कंपनियों की वजह से Grade A ऑफिस स्पेस की मांग बहुत बढ़ी है।

3. अमीर लोग REITs की तरफ क्यों बढ़ रहे हैं?

  • Stable Rental Yield: औसतन 6–8% तक का सालाना किराया।
  • Capital Appreciation: 12–15% तक combined return की संभावना।
  • Liquidity: REITs स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होते हैं, यानी आप कभी भी buy या sell कर सकते हैं।
  • Diversification: एक REIT में निवेश करके ही आप अलग-अलग शहरों और कई properties में हिस्सेदार बन जाते हैं।

4. Traditional property से तुलना

पहलूTraditional PropertyREIT Investment
Entry Costकरोड़ों मेंकुछ हज़ार/लाख से शुरू
Rental ManagementOwner को संभालना पड़ता हैProfessional Asset Managers
Liquidityबेचने में महीने लग सकते हैंStock Exchange पर तुरंत sell
ROI5–7% औसत12–15% संभावित

👉 यही वजह है कि भारत के अमीर निवेशक अब बड़े फ्लैट या प्लॉट में पैसा फँसाने की बजाय REITs जैसे हाई-परफॉर्मिंग, लिक्विड और कैश-फ्लो-बेस्ड निवेश की तरफ झुक रहे हैं।

बदलती निवेश रणनीतियाँ – अमीरों का नया प्लेबुक

बदलती निवेश रणनीतियाँ – अमीरों का नया प्लेबुक

1. Fractional Ownership का क्रेज

पहले प्रॉपर्टी का मतलब था – पूरी बिल्डिंग या प्लॉट खरीदना। लेकिन अब खेल बदल चुका है।
आज अमीर लोग fractional ownership में पैसा लगा रहे हैं।

👉 मतलब क्या?
मान लीजिए एक कॉर्पोरेट ऑफिस 100 करोड़ का है। अब अकेला निवेशक खरीदने की बजाय, 100 लोग मिलकर उसमें 1-1 करोड़ लगाते हैं। इससे:

  • रिस्क बंट जाता है।
  • कम पूंजी में हाई-क्लास प्रॉपर्टी का हिस्सा मिल जाता है।
  • किराये से आने वाली इनकम pro-rata basis पर सभी को मिलती है।

यही वजह है कि अमीर अब “पूरी प्रॉपर्टी” लेने की बजाय fractional stake लेना पसंद कर रहे हैं।


2. REITs (Real Estate Investment Trusts)

स्टॉक मार्केट की तरह रियल एस्टेट में भी अब REITs आ चुके हैं।
ये क्या हैं?

  • बड़ी रियल एस्टेट कंपनियाँ (जैसे Embassy, Brookfield) अपने मॉल्स, ऑफिस स्पेस, IT पार्क को REITs में डालती हैं।
  • आम निवेशक सिर्फ ₹10,000 से भी इसमें हिस्सा खरीद सकता है।
  • रिटर्न आता है किराये और प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन से।

👉 अमीर लोग इसका इस्तेमाल diversification के लिए करते हैं क्योंकि इसमें liquidity है और direct property purchase की झंझट नहीं।


3. Diversification Beyond Real Estate

पहले पुरानी सोच: “सारा पैसा जमीन में लगाओ, सुरक्षित रहेगा।”
अब नई सोच:

  • 30% रियल एस्टेट (REITs, fractional)
  • 40% स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स
  • 20% स्टार्टअप्स और प्राइवेट इक्विटी
  • 10% गोल्ड, क्रिप्टो या अन्य alternative assets

👉 ये balanced portfolio approach ही आज के अमीरों का नया मंत्र है।


4. Rental Yield vs Capital Gain

पहले लोग मानते थे कि प्रॉपर्टी की कीमत double-triple हो जाएगी।
आज scenario:

  • Tier-1 cities (Delhi, Mumbai, Bangalore) में rental yield सिर्फ 2-3% है।
  • इसके मुकाबले commercial REITs या fractional offices 6-9% तक rental yield दे रहे हैं।

👉 इसलिए अमीर residential की बजाय commercial plays चुन रहे हैं।

भारत में रियल एस्टेट मार्केट के नए ट्रेंड्स (2025 और आगे)


1. Affordable Housing और Mid-Segment की डिमांड

Luxury flats और premium villas अब सिर्फ सीमित लोगों के लिए रह गए हैं।
2025 तक सबसे ज्यादा मांग ₹40-70 लाख वाले affordable और mid-segment housing में देखी जा रही है।
👉 इसका कारण:

  • Middle-class population का urban migration
  • Government की Pradhan Mantri Awas Yojana जैसी schemes
  • Easy home loan availability

2. Co-Living और Rental Economy का Rise

आजकल Millennials और Gen Z लंबे EMI के झंझट में नहीं पड़ना चाहते।

  • वे prefer करते हैं co-living spaces (shared apartments, furnished rentals)।
  • इसका मतलब residential property खरीदने की बजाय rent-based economy तेजी से बढ़ रही है।

👉 Investors के लिए भी ये model attractive है क्योंकि furnished rentals का rental yield ज्यादा है।


3. Smart Cities और Infrastructure Push

India में 100+ smart cities mission चल रहा है।

  • Dwarka Expressway (Delhi NCR)
  • Peripheral Ring Road (Bangalore)
  • Metro विस्तार (Pune, Ahmedabad, Lucknow)

इन projects से connectivity बढ़ेगी, commercial hubs develop होंगे और long-term property demand sustain रहेगी।


4. NRI Investment का बढ़ता रुझान

भारत के रियल एस्टेट में NRIs का पैसा लगातार बढ़ रहा है।

  • UAE, US और UK से NRIs commercial और luxury residential property में निवेश कर रहे हैं।
  • कारण: Rupee depreciation + India’s growing economy.

👉 लेकिन interesting बात यह है कि NRIs भी अब fractional commercial ownership और REITs में interest दिखा रहे हैं।


5. Digital Real Estate Platforms का Boom

जहाँ पहले प्रॉपर्टी खरीदना मतलब local broker से deal करना होता था,
अब AI-driven platforms (जैसे Realzapp, PropTiger, MagicBricks) buyers-sellers को जोड़ रहे हैं।

  • Verified listings
  • Virtual tours
  • Investment analysis tools

👉 Tech-savvy अमीर इन्हीं platforms से प्रॉपर्टी चुनते हैं बजाय पुरानी traditional methods के।


6. Sustainable और Green Housing की डिमांड

Climate change और rising awareness के कारण:

  • Solar-powered homes
  • Rainwater harvesting
  • Energy-efficient apartments

👉 ये सब future demand के नए pillars हैं।


निवेशकों के लिए सीख और नया रोडमैप (Actionable Guide)

(Primary Keyword: भारत में प्रॉपर्टी निवेश का नया तरीका | LSI Keywords: real estate investment tips, diversified portfolio, smart investing, future-ready assets, passive income strategies)


1. सोच बदलनी होगी – प्रॉपर्टी ही सबकुछ नहीं

पुरानी पीढ़ी का mindset था – “जमीन और मकान सबसे सुरक्षित निवेश हैं।”
लेकिन आज के समय में diversification ही सबसे बड़ी कुंजी है।
👉 इसलिए smart investor को ये समझना होगा कि real estate सिर्फ portfolio का एक हिस्सा है, पूरा game नहीं।


2. Residential की बजाय Commercial पर Focus करें

  • Residential property → low rental yield (2–3%)
  • Commercial (office spaces, warehouses, retail) → higher yield (6–9%)
    👉 अगर real estate में रहना है, तो commercial assets ज्यादा स्मार्ट विकल्प हैं।

3. REITs और Fractional Ownership को अपनाएँ

  • कम पूंजी में बड़े assets में हिस्सा लेने का मौका।
  • Passive income + liquidity का फायदा।
    👉 ये 2025 के बाद real estate investment का नया trend होगा।

4. Smaller Cities और Growth Corridors पर नजर रखें

  • Delhi, Mumbai saturated हैं।
  • लेकिन Lucknow, Indore, Jaipur, Chandigarh, Sonipat, Panipat जैसे शहर growth stage में हैं।
    👉 यहाँ property prices reasonable हैं और appreciation का scope ज्यादा है।

5. Technology और Data-driven Platforms का इस्तेमाल करें

अब decision केवल “broker की बात” पर मत करें।

  • Verified property portals
  • AI valuation tools
  • Rental yield calculators
    👉 ये tools investor को informed decisions लेने में मदद करेंगे।

6. Sustainable और Future-Ready Assets चुनें

  • Green certified buildings
  • Energy-efficient homes
  • Properties with smart connectivity (metro, airport, highways nearby)
    👉 इनका resale value और rental demand दोनों high रहते हैं।

7. Diversification को Thumb Rule बनाएँ

Smart roadmap:

  • 30% Real Estate (REITs + commercial)
  • 40% Equity/Mutual Funds
  • 20% Private Equity/Startups
  • 10% Gold/Alternative Assets

👉 यही mix अमीर लोग आज follow कर रहे हैं, और यही आम निवेशकों को भी सीखना चाहिए।

निष्कर्ष: भारत में प्रॉपर्टी निवेश का नया परिदृश्य

2025 तक भारत का रियल एस्टेट मार्केट पूरी तरह बदल चुका है।

  • Traditional residential property अब अमीरों के लिए प्राथमिक विकल्प नहीं है।
  • Reasons: low rental yield, high maintenance cost, liquidity problem और better returns in alternative assets।
  • अब investment focus shift हो चुका है commercial REITs, fractional ownership, co-living rentals और global properties की तरफ।

मिडल-क्लास निवेशकों को भी यह सीख लेना चाहिए कि:

  • Smart investment मतलब diversified portfolio और cash-flow-based assets
  • सही लोकेशन और नए investment tools अपनाकर बेहतर रिटर्न हासिल किए जा सकते हैं।
  • Technology-driven platforms, green buildings और smart cities में निवेश करना भविष्य के लिए ज्यादा सुरक्षित है।

इस तरह, “भारत के अमीर अब प्रॉपर्टी नहीं खरीदते” सिर्फ एक headline नहीं, बल्कि आज के रियल एस्टेट निवेश की नई वास्तविकता है।

FAQs –

Q1: Fractional Ownership क्या है और इसे कैसे करें?

Fractional Ownership में एक प्रॉपर्टी को छोटे हिस्सों में बांटा जाता है। निवेशक केवल अपने हिस्से का पैसा लगाते हैं और rental income + capital appreciation proportional रूप में मिलता है। प्लेटफार्म: Renivesh, Claravest आदि।

Q2: REITs में निवेश करने के फायदे क्या हैं?

Low entry cost
High liquidity
Professional management
Rental yield + capital appreciation

Q3: क्या मिडल-क्लास निवेशकों के लिए भी REITs सही हैं?

हाँ। कम निवेश से आप बड़े commercial assets में हिस्सा ले सकते हैं और passive income पा सकते हैं।

Q4: Rental yield residential vs commercial में कितना फर्क है?

Residential: 2–3%, Commercial: 6–9%। इसलिए अमीर लोग commercial prefer करते हैं।

Q5: भारत में रियल एस्टेट 2025 में सबसे ज्यादा growth कहाँ होगी?

Smaller cities, growth corridors, smart city projects और infrastructure-enhanced zones जैसे Lucknow, Jaipur, Indore, Chandigarh, Panipat आदि।

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